पिछले कुछ दिनों से टीवी पर एक विदेशी मोबाइल कंपनी का विज्ञापन आ रहा है जिसमे दिखाते हैं की एक बाप अपने बेटे को समान सही से न रखने पर डांट रहा है. बेटा डांट सुन रहा है कि अचानक उसको अपना मोबाइल याद आता है और फिर बेटा अपने मोबाइल का FM radio चालू कर के कान मे earphone घुसा लेता है और बाप की बात पर कोई ध्यान नही देता. इस विज्ञापन मे ये दिखाया है की बाप कुछ भी बोलता रहे तुम बस कान मे earphone लगा कर FM radio सुनो और ऐसा करने के लिए उनकी कंपनी का नया मोबाइल खरीदो.
क्या मोबाइल कम्पनियाँ अपने मोबाइल बेचने की होड़ में यह भूल गयीं हैं की भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान के बराबर का दर्जा दिया गया है. हमारे नैतिक मूल्य हमें माता-पिता का अपमान करना नहीं सिखाते. इस प्रकार के विज्ञापनों से वो हमारी संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करके हमें भी पश्चिमी सभ्यता के उस अंधकारमयी पथ पर प्रदर्शित करना चाहते हैं जहाँ बच्चे माता-पिता की इज्ज़त नहीं करते? ऐसे विज्ञापन भारतीय और हिंदू संस्कृति का पतन कर रहे हैं. आज की नन्ही पीढ़ी इन विज्ञापनों से क्या सीख लेगी? आज के युग मे नई पीढ़ी पर सबसे ज्यादा असर टीवी के विज्ञापनों का ही होता है.हमें इसके विरुद्ध आवाज़ उठानी चाहिए. इस प्रकार के विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए अन्यथा नई पीढ़ी इन्हीं विज्ञापनों का अनुसरण करना शुरू कर देगी और इसके लिए हम उन्हें दोष नहीं दे सकते, इसके जिम्मेदार हम स्वयं ही होंगे.
लेखक
मयंक कुमार
Software Engineer
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिस्पर्धी विज्ञापनों का भारतीय और हिंदू संस्कृति पर दुष्प्रभाव:
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2 comments:
अजीब सी बात लिखी है आपने..... श्याद ही कोई युवा होगा जो इस विज्ञापन से खुद को नहीं जोड़ पाया होगा, आखिर हम लोग कब तक ये दिखावा करते रहेंगे की हम सबसे महान समझे जाते हैं, और विज्ञापन बहुरास्त्रिया कम्पनी का हो सकता है बनाने वाले तो भारतीये ही हैं... थोडा सा sense of humer भी लाईये जीवन में, आदर्शों का नकाब हटा कर
सही कहा आपने. मैं आपकी बात का खंडन नहीं कर रहा लेकिन अगर आप TV देखते हैं तो शायद आपको मालूम होगा की अब वो विज्ञापन नही दिखाया जा रहा है. ऐसा इस post की वजह से नहीं हुआ, लेकिन ऐसा होने के पीछे मुख्य कारण यही रहा होगा.
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